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बिहार में 64 लाख स्कूली बच्चों पर योजनाओं का संकट
बिहार में लाखों स्कूली बच्चों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं पर संकट गहरा गया है। राज्य में अब तक करीब 64 लाख से अधिक छात्रों के अपार (APAAR) कार्ड नहीं बन पाए हैं, जिसके कारण उन्हें यूनिफॉर्म, किताब और साइकिल जैसी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 2 करोड़ 6 लाख से अधिक छात्रों का अपार कार्ड बनना है, लेकिन 10 मार्च तक केवल 1 करोड़ 42 लाख छात्रों का ही अपार आईडी बन पाया है। यानी अभी भी लाखों बच्चों का पंजीकरण बाकी है।
17 लाख बच्चों का आधार सत्यापन के बाद भी नहीं बना कार्ड
रिपोर्ट के अनुसार करीब 17 लाख ऐसे छात्र हैं जिनका आधार कार्ड सत्यापित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उनका अपार कार्ड नहीं बन पाया है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है।
निजी स्कूलों में स्थिति ज्यादा खराब
सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में अपार कार्ड बनने की स्थिति और खराब बताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में अधिकांश छात्रों का पंजीकरण हो चुका है, जबकि निजी स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्रों का अपार कार्ड अभी तक नहीं बना है।
क्या है अपार कार्ड
अपार (Automated Permanent Academic Account Registry) कार्ड छात्रों के लिए 12 अंकों की यूनिक डिजिटल आईडी है। इसे “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी” भी कहा जाता है। यह आधार से जुड़ा होता है और इसमें छात्र की मार्कशीट, सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं।
कार्ड नहीं बनने के कारण
अधिकारियों के अनुसार कई बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना है या आधार में त्रुटियां हैं। इसके अलावा अभिभावकों और स्कूलों द्वारा जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के कारण भी अपार कार्ड बनने की प्रक्रिया धीमी है।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को जल्द से जल्द छात्रों के आधार और अपार कार्ड बनवाने का निर्देश दिया है ताकि बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
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