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पटना, बिहार: बिहार की राजनीति में इन दिनों नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के भविष्य को लेकर कयासों का दौर जारी है और 30 मार्च को एक अहम तारीख के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत मुख्यमंत्री को विधानसभा की सदस्यता छोड़नी पड़ सकती है। नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानसभा का सदस्य नहीं रह सकता, इसलिए 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना अनिवार्य होता है।
सूत्रों के मुताबिक, 27 से 30 मार्च के बीच इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी हो सकती है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। हालांकि, यह भी साफ किया गया है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ना तुरंत जरूरी नहीं है, क्योंकि वे कुछ समय तक बिना विधायक बने भी पद पर बने रह सकते हैं।
नेतृत्व बदलाव को लेकर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर बदलाव होता है तो नया मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा और जदयू के भीतर संभावित चेहरों को लेकर मंथन जारी है।
हाल ही में NDA की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो नया चेहरा गठबंधन की सहमति से तय किया जाएगा।
परिवार और पार्टी में भी हलचल
इसी बीच, मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। पार्टी के कई नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं, जिससे नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और बल मिला है।
फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं
हालांकि, जदयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि फिलहाल कोई बड़ा बदलाव तय नहीं है और पार्टी में Nitish Kumar की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
क्यों अहम है 30 मार्च?
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राज्यसभा चुनाव के बाद पद छोड़ने की समयसीमा
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राजनीतिक रणनीति तय करने का मौका
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संभावित नेतृत्व बदलाव पर अंतिम फैसला
- EXPOSE BIHAR DESK