बिहार में गैस सिलेंडर का संकट गहराया, कई जगहों पर होम डिलीवरी बंद; गोदाम से भी खाली हाथ लौट रहे उपभोक्ता

Date: 2026-03-11
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मुजफ्फरपुर : सहबाजपुर के सूरज कुमार के यहां दो दिनों से गैस का चूल्हा नहीं जल रहा है। उसके घर पर गैस नहीं पहुंच रहा है। अंत में वह सहबाजपुर चौक पर गैस सिलेंडर लेने आया, मगर उसे मंगलवार को भी निराशा हाथ लगी।

मिठनपुरा के रंजीत कुमार की भी यही कहानी। होली के पहले गैस का नंबर लगाया था। अब उसे फिर से नंबर लगाने को कहा जा रहा है। इसके बाद ही गैस सिलेंडर मिल सकेगा।

रसोई गैस की इस तरह की मारामारी जिले में करीब-करीब सभी जगह है। खाड़ी देशों में लगातार भीषण युद्ध के बाद गैस की किल्लत हो गई है। गैस के लिए नंबर लगाने की तिथि जहां 16 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन हो गई है, वहीं घरों तक सिलेंडर पहुंचाया नहीं जा रहा है।

गैस वेंडर नहीं उठा रहे फोन
गैस वेंडर उपभोक्ताओं का फोन नहीं उठा रहे। यहां तक कि एजेंसी की ओर से भी पुख्ता जवाब नहीं मिल रहा। बस यही कहा जा रहा है कि गैस की किल्लत नहीं है।

मगर जिस तरह की स्थिति बनती जा रही है उससे यह लग रहा है कि किल्लत के साथ गैस की कालाबाजारी ना शुरू हो जाए। इस संबंध में विशेष शाखा की ओर से आशंका जता भी दी गई है।

सुबह से ही लंबी-लंबी लाइन
मंगलवार सुबह की पहली किरण फूटने से पहले ही वितरण केंद्रों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग गईं। वहीं, घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।

सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं और कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बनी रही। कई महिलाओं ने बताया कि सिलेंडर खत्म होने के डर से वे सुबह पांच बजे ही पहुंच गईं। कुछ को गैस मिली तो कुछ खाली हाथ लौटी। आम उपभोक्त परेशान है कि अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में रसोई संभालना मुश्किल हो जाएगा।

ईरान-इजराइल युद्ध का असर
इधर, एजेंसी संचालकों का कहना है कि जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, बैकलाग खत्म करना मुश्किल है। कुछ एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनियों द्वारा होली आवंटन में की गई 20 प्रतिशत की कटौती का असर भी दिख रहा है। पर्व के दौरान रिफिलिंग बंद थी। ऊपर से खाड़ी देशों में लड़ाई।

हर एजेंसी पर एक हजार से अधिक सिलेंडरों का बैकलाग चल रहा है। जिन्होंने दस दिन पहले बुकिंग कराई थी, उन्हें अब मुहैया हो रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि नए नियमों और ई-केवाईसी की जटिलता ने भी आग में घी का काम किया है। सर्वर की सुस्त रफ्तार और सत्यापन की अनिवार्य प्रक्रिया परेशानी का सबक बन रहा है।
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