पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर लगातार अटकलें तेज हो गई हैं। राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बावजूद उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ा है, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं और राज्यसभा जा चुके हैं। इसके बावजूद वे अभी भी मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं और लगातार राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।
संवैधानिक नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में उन्हें एक निश्चित समयसीमा के भीतर किसी एक पद से इस्तीफा देना होगा। हालांकि, राज्यसभा चुनाव के गजट नोटिफिकेशन में देरी के कारण फिलहाल वे दोनों पदों पर बने हुए हैं।
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार ‘खरमास’ खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कोई बड़ा या शुभ कार्य नहीं किया जाता। ऐसे में नई सरकार का गठन और शपथ ग्रहण समारोह 14 अप्रैल के बाद ही संभव माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में पहली बार BJP के नेतृत्व में मुख्यमंत्री बन सकता है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय जैसे नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, हालांकि अभी तक किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
इसके अलावा यह भी चर्चा है कि जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। वहीं, सरकार गठन में BJP और JDU के बीच मंत्री पदों का फॉर्मूला भी तय होने की बात कही जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। माना जा रहा है कि खरमास खत्म होते ही बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह खबर मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है। आधिकारिक घोषणा या निर्णय के अनुसार स्थिति में बदलाव संभव है।
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